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Divine Dental Careडेंटल क्लिनिक · अंकलेश्वर

डेंटल इम्प्लांट

अंकलेश्वर में डेंटल इम्प्लांट

जबड़े की हड्डी में लगाया जाने वाला एक छोटा पोस्ट, जो क्राउन, ब्रिज या डेंचर को सहारा देता है और एक या ज्यादा निकल चुके दांतों की जगह लेता है।

दो असली दांतों के बीच, जबड़े की हड्डी में लगे पेंच जैसे टाइटेनियम इम्प्लांट, एबटमेंट और पोर्सिलेन क्राउन का चित्र

डेंटल इम्प्लांट निकल चुके दांत की जड़ की जगह लेता है। यह पेंच (स्क्रू) के आकार का एक छोटा पोस्ट होता है, जो आमतौर पर टाइटेनियम का बना होता है और जबड़े की हड्डी में लगाया जाता है। अगले कुछ महीनों में हड्डी आमतौर पर इम्प्लांट की सतह से जुड़ जाती है, और फिर इम्प्लांट क्राउन, ब्रिज या डेंचर को सहारा दे सकता है।

कई लोगों के लिए इम्प्लांट, बगल के स्वस्थ दांतों को घिसे बिना, निकल चुके दांत की जगह भरने का एक स्थिर तरीका है। अंकलेश्वर के Divine Dental Care में इम्प्लांट की योजना ध्यान से बनाई जाती है: डेंटिस्ट (दांतों के डॉक्टर) पहले आपके मसूड़ों, हड्डी और आम सेहत की जांच करती हैं, बताती हैं कि इम्प्लांट आपके लिए ठीक है या नहीं, और उसकी तुलना ब्रिज या डेंचर (बत्तीसी) जैसे दूसरे विकल्पों से करती हैं।

इलाज में क्या होता है

इम्प्लांट के तीन हिस्से होते हैं:

  • इम्प्लांट – वह पोस्ट जो हड्डी में लगा रहता है
  • एबटमेंट – जोड़ने वाला हिस्सा, जो इम्प्लांट को ऊपर लगने वाले दांत से जोड़ता है
  • क्राउन, ब्रिज या डेंचर – दिखने वाला हिस्सा, जिसे जितना हो सके आपके बाकी दांतों जैसा बनाया जाता है

इलाज आमतौर पर कई चरणों (स्टेज) में होता है। लोकल एनेस्थीसिया (इंजेक्शन से हिस्सा सुन्न करना) देकर इम्प्लांट लगाने के बाद, उसके चारों ओर हड्डी को भरने में समय लगता है – अक्सर कुछ महीने। हड्डी पूरी तरह भर जाने के बाद फाइनल दांत लगाया जाता है।

हर किसी के जबड़े में इम्प्लांट के लिए काफी हड्डी नहीं होती, खासकर अगर दांत बहुत पहले निकल गया हो। मसूड़ों की सेहत, स्मोकिंग (बीड़ी-सिगरेट पीना), कंट्रोल में न रहने वाली डायबिटीज (शुगर) और कुछ दवाइयां – ये सब ठीक होने पर असर डाल सकते हैं। डेंटिस्ट आपसे बात करेंगी कि क्या बोन ग्राफ्टिंग (हड्डी बढ़ाने की प्रक्रिया) जैसे एक्स्ट्रा कदमों की जरूरत पड़ सकती है, या कोई दूसरा विकल्प आपके लिए ज्यादा ठीक रहेगा।

मरीज आमतौर पर किन वजहों से आते हैं

  • एक दांत न होना, खासकर ऐसी जगह पर जो दिखाई देती है
  • कई दांत न होना, जिनकी जगह इम्प्लांट पर टिका ब्रिज लगाया जा सकता है
  • नीचे का ढीला डेंचर, जो खाते या बोलते समय हिलता है
  • ऐसा दांत जो बचाया नहीं जा सकता और जिसके लिए दांत निकलवाना पड़ेगा
  • ब्रिज के लिए बगल के स्वस्थ दांतों को घिसवाना न चाहना
  • मुंह में पीछे की तरफ खाली जगह होने से चबाने में दिक्कत

Divine Dental Care में इलाज कैसे होता है

  1. कंसल्टेशन (सलाह) और जांच। डेंटिस्ट खाली जगह, बगल के दांत, आपके मसूड़े और आपका बाइट (ऊपर-नीचे के दांत कैसे मिलते हैं) देखती हैं, और आपकी मेडिकल हिस्ट्री (पुरानी बीमारियां) और दवाइयों के बारे में पूछती हैं।
  2. एक्स-रे और योजना। डिजिटल एक्स-रे से हड्डी की हालत समझने में मदद मिलती है। कुछ केस में हड्डी नापने और नसों व साइनस (नाक के पास हड्डी में खाली जगह) की जगह देखने के लिए 3D स्कैन (CBCT) की भी जरूरत होती है; अगर इसकी जरूरत हो, तो डेंटिस्ट आपको बताएंगी, और यह भी कि यह कहां करवाया जा सकता है।
  3. योजना समझाना। आपके फैसला लेने से पहले आपको बताया जाता है कि शायद कितने चरण होंगे, ठीक होने में लगभग कितना समय लगेगा, दूसरे विकल्प क्या हैं और हर एक में क्या होता है।
  4. इम्प्लांट लगाना। लोकल एनेस्थीसिया देकर इम्प्लांट हड्डी में लगाया जाता है, और मसूड़े को टांके लगाकर बंद किया जा सकता है।
  5. ठीक होना और जांच। कुछ महीनों में इम्प्लांट के चारों ओर हड्डी भरती है, और इस दौरान सब ठीक चल रहा है या नहीं, यह देखने के लिए आपको जांच के लिए बुलाया जाता है।
  6. फाइनल दांत लगाना। दांतों का नाप (इम्प्रेशन) लिया जाता है, और क्राउन, ब्रिज या डेंचर बनाकर इम्प्लांट पर लगाया जाता है।

इलाज के बाद देखभाल और रिकवरी

इम्प्लांट लगने के बाद कुछ दिनों तक थोड़ी सूजन, हल्का नील पड़ना और तकलीफ होना आम है। डेंटिस्ट आपको कुछ हिदायतें देंगी, जिनमें आमतौर पर नरम खाना खाना, उस जगह से न चबाना, स्मोकिंग न करना और बताए गए तरीके से मुंह साफ रखना शामिल होता है। दर्द की सिर्फ वही दवा लें जिसे आपके डॉक्टर या फार्मासिस्ट (केमिस्ट) आपके लिए सुरक्षित बताएं, और कोई भी दवा ठीक वैसे ही लें जैसे डेंटिस्ट ने लिखी है।

फाइनल दांत लग जाने के बाद उसकी देखभाल असली दांत की तरह करें: दिन में दो बार ब्रश करें, इम्प्लांट के आसपास फ्लॉस (दांत साफ करने का धागा) या छोटे इंटरडेंटल ब्रश (दांतों के बीच साफ करने वाले ब्रश) से सफाई करें, और नियमित चेक-अप (जांच) कराते रहें। अच्छी सफाई न हो तो इम्प्लांट के आसपास के मसूड़े और हड्डी में इन्फेक्शन (पेरी-इम्प्लांटाइटिस) हो सकता है, और स्मोकिंग से इसका खतरा बढ़ जाता है। जब आप तैयार हों, तो अंकलेश्वर के क्लिनिक में इम्प्लांट कंसल्टेशन के लिए अपॉइंटमेंट बुक करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या मेरे लिए डेंटल इम्प्लांट सही है?

स्वस्थ मसूड़ों और जबड़े में काफी हड्डी वाले कई वयस्कों के लिए इम्प्लांट के बारे में सोचा जा सकता है, लेकिन यह फैसला डेंटिस्ट आपकी जांच करके और एक्स-रे देखकर ही करती हैं। कंट्रोल में न रहने वाली डायबिटीज, स्मोकिंग, कुछ दवाइयां और मसूड़ों की बीमारी इम्प्लांट के सही होने पर असर डाल सकती हैं, या इन पर पहले ध्यान देना पड़ सकता है।

पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगता है?

यह हर किसी में अलग होता है। फाइनल दांत लगने से पहले इम्प्लांट के चारों ओर हड्डी भरने में आमतौर पर कुछ महीने लगते हैं, और अगर बोन ग्राफ्टिंग की जरूरत हो तो इससे ज्यादा। डेंटिस्ट आपके केस के हिसाब से अंदाजा बताएंगी।

क्या इम्प्लांट की सर्जरी में दर्द होता है?

उस जगह को लोकल एनेस्थीसिया से सुन्न किया जाता है, इसलिए प्रक्रिया के दौरान आमतौर पर दर्द की जगह दबाव महसूस होता है। बाद में कुछ दिनों तक थोड़ा दर्द और सूजन होना आम है।

इम्प्लांट कितने साल चलते हैं?

अच्छी सफाई, नियमित चेक-अप और स्मोकिंग न करने से इम्प्लांट कई साल चल सकते हैं। ऊपर लगा क्राउन समय के साथ घिस सकता है और उसे बदलना पड़ सकता है, और कोई भी डेंटिस्ट यह वादा नहीं कर सकता कि इम्प्लांट जिंदगी भर चलेगा।

अगर इम्प्लांट नहीं लग सकता, तो क्या करें?

ब्रिज या पार्शियल (कुछ दांतों का) या पूरा डेंचर भी निकल चुके दांतों की जगह भर सकते हैं। डेंटिस्ट हर एक के फायदे और सीमाएं समझाएंगी।

हर किसी का मुंह अलग होता है। आपके लिए सही इलाज तभी तय होता है जब Dr. Dhara M. Sudani आपके दांतों की जांच करती हैं और ज़रूरत हो तो एक्स-रे लेती हैं। यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है, यह आपकी बीमारी की पहचान (डायग्नोसिस) नहीं है।

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