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Divine Dental Careडेंटल क्लिनिक · अंकलेश्वर

बच्चों के दांतों का इलाज

अंकलेश्वर में बच्चों के दांतों की फिलिंग

दांत के रंग की फिलिंग, जो दूध के दांतों और नए पक्के दांतों की कैविटी ठीक करती है, ताकि आपका बच्चा आराम से चबा सके, बोल सके और मुस्कुरा सके।

मुलायम टूथब्रश के पास, बच्चे के मसूड़े में दूध की दो दाढ़ों का चित्र, जिनमें से एक में दांत के रंग की साफ़-सुथरी फिलिंग है

दांतों की सड़न (कीड़ा लगना) बच्चों की सबसे आम सेहत की समस्याओं में से एक है। दूध के दांतों का इनेमल (दांत की ऊपरी सख्त परत) पक्के दांतों से पतला होता है, इसलिए छोटी सी कैविटी भी जल्दी बढ़ सकती है, और कई कैविटी में शुरुआत में कोई दर्द नहीं होता। माता-पिता को अक्सर इनका पता तभी चलता है, जब कोई काला धब्बा या छेद दिखता है या बच्चा दर्द की शिकायत करता है।

फिलिंग (दांत भरवाना) से कैविटी वाला दांत ठीक किया जाता है। सड़ा हुआ हिस्सा निकालकर उस जगह को भर दिया जाता है, ताकि दांत फिर से सामान्य रूप से इस्तेमाल हो सके। अंकलेश्वर के Divine Dental Care में डेंटिस्ट (दांतों के डॉक्टर) दांत की जांच करती हैं, आपको समझाती हैं कि दांत को क्या चाहिए और क्यों, और आपके बच्चे के लिए विजिट को जितना हो सके उतना शांत और आसान रखती हैं।

इलाज में क्या होता है

क्लिनिक में फिलिंग दांत के रंग की होती है, इसलिए यह आपके बच्चे के दांतों में घुल-मिल जाती है। इसका इस्तेमाल इनमें होता है:

  • दूध के दांत, जिनकी बच्चों को कई साल तक जरूरत होती है – पीछे के कुछ दूध के दांत लगभग 10 से 12 साल की उम्र तक रहते हैं
  • नए पक्के दांत, जैसे पहली पक्की दाढ़ें, जो लगभग 6 साल की उम्र में निकलती हैं। कई माता-पिता इन्हें दूध के दांत समझते हैं, क्योंकि इनके निकलने से पहले कोई दांत नहीं गिरता।

सड़न के हर शुरुआती निशान में फिलिंग की जरूरत नहीं होती। चॉक जैसे सफेद धब्बे को कभी-कभी बेहतर ब्रशिंग, फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट और कम मीठे स्नैक्स से रोका जा सकता है; डेंटिस्ट फ्लोराइड लगाने और उस पर नजर रखने की सलाह दे सकती हैं। अगर पीछे के दूध के दांत में बड़ी कैविटी है, तो बड़ी फिलिंग के बजाय स्टेनलेस स्टील क्राउन उसे बेहतर तरीके से बचा सकता है। अगर सड़न नस तक पहुंच गई है, तो पहले नस का इलाज, जैसे पल्पेक्टॉमी, करना पड़ सकता है।

कैविटी के संकेत और फिलिंग की सलाह कब दी जाती है

इन बातों पर ध्यान दें:

  • दांतों पर चॉक जैसे सफेद धब्बे, या भूरे या काले धब्बे
  • दिखने वाला छेद, या एक ही जगह पर बार-बार खाना फंसना
  • मीठा, ठंडा या गरम खाने-पीने पर सेंसिटिविटी (ठंडा-गरम लगना) या दर्द
  • बच्चे का एक तरफ से चबाने से बचना या कुछ चीजें खाने से मना करना

फिलिंग की सलाह आमतौर पर तब दी जाती है, जब सड़न से दांत में छेद बन गया हो, लेकिन सड़न नस तक न पहुंची हो। कई कैविटी सिर्फ बच्चों के डेंटल चेक-अप में ही पकड़ में आती हैं। अगर दर्द से बच्चे की रात में नींद खुल जाए, सूजन हो, या मसूड़े पर फुंसी जैसा छोटा दाना दिखे, तो इसका मतलब हो सकता है कि सड़न और गहरी चली गई है – जल्दी क्लिनिक से संपर्क करें। अगर सूजन आंख या गर्दन की तरफ फैलने लगे, या बच्चे को तेज बुखार हो या सांस लेने या निगलने में तकलीफ हो, तो तुरंत अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में जाएं – देखें इमरजेंसी डेंटल केयर।

दूध के दांतों और नए पक्के दांतों में फिलिंग के फायदे

कुछ माता-पिता सोचते हैं कि जब दूध का दांत वैसे भी गिर जाएगा, तो उसमें फिलिंग क्यों करवाएं। कैविटी का जल्दी इलाज:

  • दर्द और इन्फेक्शन से बचाने में मदद करता है – बिना इलाज की सड़न नस तक पहुंचकर दांत दर्द, सूजन या फोड़ा (एब्सेस) कर सकती है, और नीचे बन रहे पक्के दांत पर असर डाल सकती है
  • बच्चे को अच्छी तरह चबाने और खाने में मदद करता है – दर्द वाले दांत की वजह से बच्चा खाने से बच सकता है
  • साफ बोलने में मदद करता है – दूध के दांत, खासकर आगे के दांत, बच्चों को आवाजें और शब्द ठीक से बोलने में मदद करते हैं
  • पक्के दांतों के लिए जगह बनाए रखने में मदद करता है – अगर दूध का दांत जल्दी निकल जाए, तो बगल के दांत खाली जगह की तरफ खिसक सकते हैं और पक्का दांत अपनी जगह से हटकर निकल सकता है
  • नए पक्के दांतों को बचाता है, जिन्हें जिंदगी भर काम आना है

विजिट के लिए बच्चे को तैयार करना

विजिट के बारे में शांति से और अच्छे तरीके से बात करें – जैसे कि डेंटिस्ट "दांत को साफ करके फिर से मजबूत बना देंगी"। "दर्द", "इंजेक्शन" या "ड्रिल" जैसे शब्दों से बचें, और डेंटिस्ट के नाम से बच्चे को कभी न डराएं। विजिट से पहले बच्चे को हल्का खाना खिला दें, क्योंकि लोकल एनेस्थीसिया (इंजेक्शन से हिस्सा सुन्न करना) के बाद सुन्नपन खत्म होने तक उसे कुछ नहीं खाना चाहिए। विजिट के दौरान आप बच्चे के साथ रह सकते हैं।

Divine Dental Care में इलाज कैसे होता है

  1. चेक-अप, और जरूरत हो तो एक्स-रे। डेंटिस्ट दांत को देखती हैं और जरूरत हो तो कम रेडिएशन वाला डिजिटल एक्स-रे लेती हैं, ताकि पता चले कि सड़न कितनी गहरी है।
  2. आपको समझाना। आपको बताया जाता है कि क्या मिला, फिलिंग सही विकल्प है या नहीं, और दूसरे विकल्प क्या हैं।
  3. बच्चे को सहज महसूस कराना। हर कदम आसान शब्दों में समझाया जाता है। अगर कई दांतों का इलाज करना हो, तो इलाज को छोटी-छोटी विजिट में बांटा जा सकता है।
  4. सुन्न करना। ज्यादातर फिलिंग में लोकल एनेस्थीसिया की जरूरत होती है। बहुत छोटी फिलिंग में कभी-कभी इसकी जरूरत नहीं होती; डेंटिस्ट इस बारे में आपसे बात करेंगी।
  5. सड़न निकालना। सड़न को हल्के हाथ से निकाला जाता है और दांत साफ किया जाता है।
  6. फिलिंग लगाना। दांत के रंग की फिलिंग लगाई जाती है और उसे सख्त किया जाता है, अक्सर क्योरिंग लाइट से, फिर बच्चे की बाइट (ऊपर-नीचे के दांत कैसे मिलते हैं) के हिसाब से उसे आकार देकर पॉलिश किया जाता है।

इलाज के बाद देखभाल और घर के लिए सुझाव

लोकल एनेस्थीसिया के बाद होंठ, गाल और जीभ कुछ घंटों तक सुन्न लग सकते हैं। ध्यान रखें कि बच्चा उन्हें दांत से न काटे या न चबाए, और सुन्नपन खत्म होने के बाद नरम खाना दें। कुछ दिनों तक हल्की सेंसिटिविटी होना आम है और यह आमतौर पर ठीक हो जाती है। अगर बच्चे को दर्द की दवा चाहिए, तो सिर्फ वही दें जो आपके डॉक्टर या फार्मासिस्ट (केमिस्ट) उसकी उम्र और वजन के हिसाब से सुरक्षित बताएं। अगर फिलिंग ऊंची लगे या निकल जाए, या दर्द बना रहे या उससे बच्चे की रात में नींद खुल जाए, तो क्लिनिक से संपर्क करें।

नई कैविटी से बचाने के लिए:

  • दिन में दो बार फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से ब्रश करें, जिसमें एक बार रात को सोने से ठीक पहले हो: तीन साल से छोटे बच्चों के लिए चावल के दाने जितना पतला सा लेप, और तीन साल और उससे बड़े बच्चों के लिए मटर के दाने जितना।
  • ब्रश करने के बाद टूथपेस्ट थूक दें, लेकिन पानी से कुल्ला न करें, ताकि फ्लोराइड अपना काम करता रहे।
  • मिठाई, चॉकलेट, बिस्किट और मीठे ड्रिंक्स सिर्फ खाने के समय ही दें – बच्चा कितनी बार मीठा खाता है, यह भी मायने रखता है, सिर्फ यह नहीं कि कितना खाता है।
  • खाने के बीच में पानी या सादा दूध दें, और नाश्ते में ताजे फल या सब्जियां जैसी चीजें दें।
  • पीछे के दांतों के लिए पिट और फिशर सीलेंट के बारे में डेंटिस्ट से पूछें।

अगर आपको कोई काला धब्बा दिखे या बच्चा दांत दर्द की शिकायत करे, तो अंकलेश्वर के क्लिनिक में अपॉइंटमेंट बुक करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या फिलिंग के दौरान मेरे बच्चे को दर्द होगा?

आमतौर पर पहले दांत सुन्न किया जाता है, इसलिए ज्यादातर बच्चों को दर्द की जगह दबाव और कंपन (वाइब्रेशन) महसूस होता है। डेंटिस्ट हर कदम समझाती हैं, और अगर बच्चे को असहज लगे तो बीच में रुक सकती हैं।

क्या दूध के दांत की कैविटी को दांत गिरने तक ऐसे ही छोड़ा जा सकता है?

कभी-कभी, अगर दांत गिरने ही वाला हो और सड़न छोटी हो और कोई परेशानी न दे रही हो, तो डेंटिस्ट उस पर नजर रखने की सलाह दे सकती हैं। लेकिन अक्सर दांत को अभी कई साल रहना होता है, और ऐसे में इलाज करवाना आमतौर पर ज्यादा सुरक्षित रहता है।

मेरे बच्चे की फिलिंग कितने समय तक चलेगी?

दूध के दांत की फिलिंग को सिर्फ तब तक चलना होता है, जब तक दांत अपने आप न गिर जाए, और कई फिलिंग इतने समय तक चल जाती हैं। पक्के दांतों की फिलिंग अक्सर कई साल चलती है। हर फिलिंग की तरह ये भी घिस या टूट सकती हैं, इसलिए नियमित चेक-अप जरूरी है।

मेरा बच्चा ब्रश करता है, फिर भी उसके दांतों में कैविटी क्यों होती है?

बार-बार स्नैक्स खाना, चिपचिपी मिठाई, मीठे ड्रिंक्स और रात का ब्रश छूट जाना – ये सब खतरा बढ़ाते हैं, और पीछे के दांतों की गहरी लकीरें साफ करना मुश्किल होता है। डेंटिस्ट बच्चे के ब्रश करने का तरीका देखकर बदलाव सुझा सकती हैं।

हर किसी का मुंह अलग होता है। आपके लिए सही इलाज तभी तय होता है जब Dr. Dhara M. Sudani आपके दांतों की जांच करती हैं और ज़रूरत हो तो एक्स-रे लेती हैं। यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है, यह आपकी बीमारी की पहचान (डायग्नोसिस) नहीं है।

Divine Dental Care

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