मसूड़ों की बीमारी बड़ों में दांत गिरने का एक आम कारण है, फिर भी शुरुआत में इसका आसानी से पता नहीं चलता। यह तब शुरू होती है जब मसूड़ों की लाइन पर प्लाक (दांतों पर जमने वाली चिपचिपी परत) जमने लगता है, और मसूड़े लाल और सूजे हुए हो जाते हैं और उनसे आसानी से खून आने लगता है। इस शुरुआती अवस्था को जिंजिवाइटिस कहते हैं, और आम तौर पर क्लिनिक में प्रोफेशनल सफाई और घर पर सही ब्रशिंग से इसे ठीक किया जा सकता है।
अगर इलाज न हो, तो जिंजिवाइटिस आगे बढ़कर पेरियोडोंटाइटिस बन सकता है। दांतों को सहारा देने वाले मसूड़े और हड्डी धीरे-धीरे खराब होने लगते हैं, मसूड़ों और दांतों के बीच खाली जगह (पॉकेट) बन जाती है, और दांत हिलने लग सकते हैं। अंकलेश्वर के Divine Dental Care में मसूड़ों का इलाज ध्यान से जांच के साथ शुरू होता है, और फिर बीमारी कितनी बढ़ी है, उसके हिसाब से इलाज का प्लान बनाया जाता है।
इलाज में क्या होता है
मसूड़ों का इलाज आम तौर पर कई चरणों में होता है:
- स्केलिंग और पॉलिशिंग – जिंजिवाइटिस और हल्की बीमारी में, मसूड़ों की लाइन के ऊपर और ठीक नीचे से प्लाक और टार्टर (दांतों पर जमी सख्त परत) हटाना। देखें दांतों की सफाई और स्केलिंग।
- डीप क्लीनिंग – इसे रूट प्लानिंग भी कहते हैं, और यह ज्यादा गहरे पॉकेट के लिए होती है। मसूड़ों की लाइन के नीचे दांत की जड़ों की सतह को साफ और चिकना किया जाता है, ताकि मसूड़ा उनसे जुड़कर ठीक हो सके। यह अक्सर लोकल एनेस्थीसिया (इंजेक्शन से हिस्सा सुन्न करना) देकर किया जाता है और एक से ज्यादा विजिट में बांटा जा सकता है।
- मसूड़ों की सर्जरी – अगर डीप क्लीनिंग के बाद भी गहरे पॉकेट बचे रहें, तो एक छोटी सर्जरी की सलाह दी जा सकती है, ताकि जड़ों को अच्छी तरह साफ किया जा सके। अगर आपको इसकी जरूरत हो, तो डेंटिस्ट (दांतों के डॉक्टर) समझाएंगी कि इसमें क्या-क्या होता है।
- मेंटेनेंस (नियमित देखभाल) – नियमित जांच और सफाई के लिए आना, क्योंकि प्लाक दोबारा जमने पर मसूड़ों की बीमारी वापस आ सकती है।
मसूड़ों की सेहत का संबंध पूरे शरीर की सेहत से है। बीड़ी-सिगरेट पीना और तंबाकू चबाना मसूड़ों की बीमारी को और बिगाड़ते हैं और घाव भरने में देर करते हैं, और अगर डायबिटीज (शुगर) ठीक से कंट्रोल में न हो तो खतरा बढ़ जाता है। प्रेगनेंसी (गर्भावस्था) के दौरान हार्मोन में बदलाव से भी मसूड़े आसानी से सूज सकते हैं और उनसे खून आ सकता है।
मरीज आमतौर पर किन वजहों से आते हैं
- ब्रश करते, फ्लॉस करते या खाते समय मसूड़ों से खून आना
- मसूड़े लाल होना, सूजना या छूने पर दुखना
- मुंह से बदबू आना या मुंह का स्वाद बार-बार खराब होना
- मसूड़ों का नीचे खिसक जाना, जिससे दांत लंबे दिखने लगें
- दांत हिलते हुए लगना या उनके बीच जगह बनने लगना
- दांतों और मसूड़ों के बीच से मवाद (पस) आना
Divine Dental Care में इलाज कैसे होता है
- मसूड़ों की जांच। डेंटिस्ट आपके मसूड़ों की जांच करती हैं और हर दांत और मसूड़े के बीच की जगह कितनी गहरी है, यह धीरे से नापती हैं।
- एक्स-रे। दांतों के आसपास की हड्डी का लेवल देखने के लिए कम रेडिएशन वाले डिजिटल एक्स-रे लिए जा सकते हैं।
- जांच का नतीजा समझाना। आपको बताया जाता है कि मसूड़ों की बीमारी किस स्टेज पर है, कौन-से दांत प्रभावित हैं और कौन-सा इलाज सुझाया गया है, और सभी विकल्प साफ-साफ समझाए जाते हैं।
- सफाई। अल्ट्रासोनिक स्केलिंग की जाती है और जहां जरूरत हो, जड़ों की सतह की डीप क्लीनिंग भी की जाती है; जरूरत पड़ने पर उस हिस्से को सुन्न किया जाता है।
- घर पर देखभाल का प्लान। आपको दिखाया जाता है कि मसूड़ों के किनारे और दांतों के बीच कैसे साफ करें, और अगर आपके लिए ठीक हों तो इंटरडेंटल ब्रश (दांतों के बीच साफ करने वाला छोटा ब्रश) से भी।
- दोबारा जांच। कुछ हफ्ते ठीक होने का समय देने के बाद मसूड़ों को फिर से देखा जाता है कि इलाज का कितना असर हुआ है और क्या आगे और इलाज, जैसे मसूड़ों की सर्जरी, की जरूरत है।
इलाज के बाद देखभाल और रिकवरी
डीप क्लीनिंग के बाद कुछ दिनों तक आपके मसूड़े दुख सकते हैं और दांतों में ठंडे से सेंसिटिविटी (ठंडा लगना) हो सकती है। मुलायम टूथब्रश और सेंसिटिव दांतों वाला टूथपेस्ट मदद कर सकते हैं। जैसे-जैसे सूजन कम होती है, मसूड़े अक्सर थोड़े सिकुड़ जाते हैं, इसलिए दांत थोड़े लंबे दिख सकते हैं और बीच में छोटी-छोटी जगह दिख सकती है। यह सूजन कम होने का संकेत है, इलाज से हुआ नुकसान नहीं।
मसूड़ों की सर्जरी के बाद डेंटिस्ट आपको खास निर्देश देंगी। दर्द की दवा सिर्फ वही लें जिसे आपके डॉक्टर या फार्मासिस्ट (केमिस्ट) आपके लिए सुरक्षित बताएं, और कोई भी दवा ठीक वैसे ही लें जैसे डेंटिस्ट ने लिखी है। मसूड़ों के इलाज का सबसे जरूरी हिस्सा वह है जो आप हर दिन करते हैं: अच्छी तरह ब्रश करना, दांतों के बीच की सफाई और, अगर आप तंबाकू लेते हैं, तो उसे छोड़ना। अगर आपके मसूड़ों से अक्सर खून आता है, तो अंकलेश्वर क्लिनिक में अपॉइंटमेंट बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या ब्रश करते समय मसूड़ों से खून आना नॉर्मल है?
नहीं। मसूड़ों से खून आना मसूड़ों की बीमारी का एक आम शुरुआती संकेत है। ब्रश करना बंद न करें; धीरे से लेकिन अच्छी तरह ब्रश करें, और अपने मसूड़ों की जांच करवाएं।
क्या मसूड़ों की बीमारी ठीक हो सकती है?
जिंजिवाइटिस आम तौर पर ठीक हो सकता है। पेरियोडोंटाइटिस को कंट्रोल किया जा सकता है और बढ़ने से रोका जा सकता है, लेकिन जो हड्डी घट चुकी है, वह आम तौर पर अपने आप वापस नहीं बनती। नियमित मेंटेनेंस विजिट से इसे कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है।
क्या डीप क्लीनिंग में दर्द होगा?
उस हिस्से को लोकल एनेस्थीसिया से सुन्न किया जा सकता है, इसलिए ज्यादातर लोगों को दर्द के बजाय दबाव और कंपन (वाइब्रेशन) महसूस होता है।
क्या प्रेगनेंसी में मसूड़ों का इलाज सुरक्षित है?
प्रेगनेंसी में मसूड़ों का इलाज आम तौर पर सुरक्षित माना जाता है, और इससे प्रेगनेंसी से जुड़ी मसूड़ों की परेशानियों में मदद मिल सकती है। डेंटिस्ट को बताएं कि आप प्रेगनेंट हैं और अपने डॉक्टर से भी बात करें, क्योंकि कुछ इलाज प्रेगनेंसी के बीच के महीनों के लिए रखे जा सकते हैं।
क्या हिलते दांत फिर से मजबूत हो सकते हैं?
कभी-कभी मसूड़े ठीक होने के बाद दांत पहले से मजबूत हो जाते हैं, लेकिन यह इस पर निर्भर करता है कि हड्डी का कितना सहारा बचा है। जिन दांतों को बहुत कम सहारा बचा हो, उन्हें बचाना शायद संभव न हो, और डेंटिस्ट आपको विकल्प समझाएंगी, जिनमें मसूड़े स्वस्थ होने के बाद डेंटल इम्प्लांट भी शामिल हो सकते हैं।
हर किसी का मुंह अलग होता है। आपके लिए सही इलाज तभी तय होता है जब Dr. Dhara M. Sudani आपके दांतों की जांच करती हैं और ज़रूरत हो तो एक्स-रे लेती हैं। यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है, यह आपकी बीमारी की पहचान (डायग्नोसिस) नहीं है।




