विनियर दांत के रंग की एक पतली परत होती है, जो दांत की आगे वाली सतह पर चिपकाई जाती है। विनियर्स ज्यादातर उन दांतों पर लगाए जाते हैं जो मुस्कुराते समय दिखते हैं, ताकि उनका रंग, आकार या लंबाई बदली जा सके, या दांतों के बीच की छोटी जगह (गैप) बंद की जा सके। इनसे मुस्कान में साफ फर्क आ सकता है, लेकिन विनियर्स लगवाना लंबे समय का फैसला है।
विनियर्स अंकलेश्वर के Divine Dental Care में होने वाले कॉस्मेटिक डेंटिस्ट्री के इलाजों में से एक हैं। डेंटिस्ट (दांतों के डॉक्टर) पहले जांचती हैं कि आपके दांत और मसूड़े स्वस्थ हैं, ध्यान से सुनती हैं कि आप क्या बदलवाना चाहते हैं, और समझाती हैं कि आपके लिए विनियर्स ठीक रहेंगे या कोई आसान विकल्प बेहतर रहेगा।
विनियर्स क्या होते हैं और उनके मुख्य प्रकार
विनियर सिर्फ दांत के आगे वाले हिस्से और काटने वाले किनारे को ढकता है, जबकि क्राउन (कैप) पूरे दांत को ढकता है। विनियर्स मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं:
- कंपोजिट विनियर्स – दांत के रंग का कंपोजिट रेजिन सीधे दांत पर लगाकर बनाया जाता है, उसे आकार दिया जाता है और क्योरिंग लाइट से सख्त किया जाता है, आम तौर पर एक ही विजिट में। इनमें अक्सर दांत को कम घिसना पड़ता है और इनकी मरम्मत हो सकती है, लेकिन इन पर दाग ज्यादा आसानी से लगते हैं और ये ज्यादा आसानी से टूट (चिप हो) सकते हैं।
- पोर्सिलेन या सिरेमिक विनियर्स – पतले खोल (शेल), जो आपके दांतों के नाप (इम्प्रेशन) से डेंटल लैब में बनाए जाते हैं और बाद की विजिट में चिपकाए जाते हैं। इन पर आसानी से दाग नहीं लगते और ये बहुत असली जैसे दिख सकते हैं, लेकिन इनके लिए आम तौर पर ज्यादा इनेमल (दांत की ऊपरी सख्त परत) हटाना पड़ता है, और टूट जाने पर आम तौर पर नया बनवाना पड़ता है।
जांच के बाद डेंटिस्ट समझाती हैं कि आपके दांतों, आपकी बाइट (ऊपर-नीचे के दांत कैसे मिलते हैं) और आप क्या नतीजा चाहते हैं, उसके हिसाब से कौन-सा प्रकार आपके लिए ठीक है।
विनियर्स लंबे समय का फैसला क्यों हैं
विनियर के लिए जगह बनाने और उसे अच्छी तरह चिपकाने के लिए आम तौर पर दांत के आगे वाले हिस्से को थोड़ा घिसकर आकार देना पड़ता है, यानी इनेमल की एक पतली परत हटाई जाती है। कंपोजिट विनियर्स में कम घिसना पड़ सकता है, और कभी-कभी बिल्कुल नहीं। इनेमल वापस नहीं बनता, इसलिए ज्यादातर मामलों में विनियर्स को वापस पहले जैसा नहीं किया जा सकता: एक बार दांत तैयार कर दिया जाए, तो उस पर हमेशा विनियर या कोई दूसरा कवर लगाना पड़ेगा।
विनियर्स हमेशा के लिए भी नहीं चलते। ये टूट (चिप हो) सकते हैं, ढीले होकर निकल सकते हैं या इनके किनारों पर दाग लग सकते हैं, और कुछ सालों बाद इन्हें बदलना पड़ सकता है। व्हाइटनिंग से इनका रंग नहीं बदलता, इसलिए अगर आप दांतों का रंग हल्का करवाना चाहते हैं, तो आम तौर पर पहले व्हाइटनिंग की जाती है और फिर विनियर्स को नए शेड (रंग) से मिलाया जाता है।
जहां किसी हल्के विकल्प से आपकी इच्छा पूरी हो सकती है, वहां डेंटिस्ट आम तौर पर पहले उसी पर बात करेंगी:
- टीथ व्हाइटनिंग, अगर सभी दांत एक जैसे पीले हुए हों या उन पर दाग हों
- कंपोजिट बॉन्डिंग, अगर एक-दो दांतों में कोई टुकड़ा टूटा हो, छोटी जगह (गैप) हो या किनारा ऊंचा-नीचा हो
- क्राउन (कैप), अगर दांतों में बड़ी फिलिंग हो, वे टूटे हों या कमजोर हो गए हों
- ब्रेसेस (तार) या अलाइनर्स, अगर दांत टेढ़े हों या एक-दूसरे पर चढ़े हुए हों, क्योंकि उन्हें ढकने के बजाय खिसकाकर सीधा किया जा सकता है
मरीज आमतौर पर किन वजहों से आते हैं
- आगे के दांत जो व्हाइटनिंग से भी काफी हल्के नहीं हुए, जैसे किसी पुरानी चोट या रूट कैनाल ट्रीटमेंट (RCT) के बाद
- डेंटल फ्लोरोसिस से दांतों पर सफेद या भूरे निशान, जो गुजरात के उन इलाकों में दिखते हैं जहां जमीन के पानी में फ्लोराइड ज्यादा होता है
- आगे के दांत जिनका कोई टुकड़ा टूटा हो, जो घिस गए हों या थोड़े छोटे हों
- आगे के दांतों के बीच छोटी जगह (गैप)
- दांत जिनका आकार या साइज थोड़ा ऊंचा-नीचा हो
अगर आपके दांतों में ऐसी सड़न (कीड़ा लगना) या मसूड़ों की बीमारी है जिसका इलाज नहीं हुआ, आप दांत बहुत ज्यादा पीसते हैं, आपके दांतों पर बहुत कम इनेमल बचा है या आपके दांत बहुत ज्यादा टेढ़े-मेढ़े हैं, तो विनियर्स शायद आपके लिए ठीक न हों।
Divine Dental Care में इलाज कैसे होता है
- कंसल्टेशन (सलाह)। डेंटिस्ट आपके दांत, मसूड़े और बाइट की जांच करती हैं, और फोटो या एक्स-रे ले सकती हैं।
- पहले सेहत। विनियर्स की योजना बनाने से पहले किसी भी सड़न या मसूड़ों की समस्या का इलाज किया जाता है।
- विकल्प और सीमाएं। डेंटिस्ट समझाती हैं कि विनियर्स आपके लिए ठीक हैं या नहीं, कौन-सा प्रकार ठीक रहेगा, आपके दांतों को कितना घिसना पड़ेगा, और दूसरे विकल्प क्या हैं। आगे बढ़ना है या नहीं, यह आप तय करते हैं।
- रंग और आकार। रंग, आकार और लंबाई आपसे बात करके तय किए जाते हैं। अगर व्हाइटनिंग करनी हो, तो वह आम तौर पर इस कदम से पहले की जाती है।
- दांत तैयार करना और विनियर्स लगाना। जहां जरूरत हो, वहां दांतों को धीरे से घिसकर आकार दिया जाता है, जरूरत हो तो लोकल एनेस्थीसिया (इंजेक्शन से हिस्सा सुन्न करना) देकर, और फिर विनियर्स चिपकाए जाते हैं, उन्हें आकार दिया जाता है और पॉलिश किया जाता है – विनियर के प्रकार के हिसाब से उसी विजिट में या बाद की विजिट में।
- दोबारा जांच। आपकी बाइट जांची जाती है और देखा जाता है कि विनियर्स कैसे दिखते और महसूस होते हैं, और जरूरत हो तो उन्हें ठीक किया जाता है।
बाद की देखभाल और विनियर्स का ख्याल कैसे रखें
दांत तैयार करने के बाद कुछ दिनों तक ठंडे-गरम से दांतों में सेंसिटिविटी (झनझनाहट) हो सकती है, और नए विनियर्स शुरू में जीभ को थोड़े अलग लग सकते हैं। यह आम तौर पर ठीक हो जाता है। अगर दांत मिलाने पर बाइट ऊंची लगे, कोई किनारा नुकीला लगे या सेंसिटिविटी ठीक न हो, तो क्लिनिक से संपर्क करें।
दिन में दो बार ब्रश करें और रोज दांतों के बीच की सफाई करें, क्योंकि विनियर के नीचे वाले दांत में किनारों पर अब भी सड़न हो सकती है। चाय, कॉफी या पान के बाद कुल्ला करें, आगे के दांतों से बर्फ, सुपारी या बोतल के ढक्कन न काटें, और अगर आप दांत पीसते हैं तो डेंटिस्ट को बताएं। नियमित चेक-अप (जांच) से छोटे टूटे हिस्से या दाग जल्दी पकड़ में आ जाते हैं। विनियर्स आपके लिए ठीक हैं या नहीं, यह जानने के लिए अंकलेश्वर क्लिनिक में अपॉइंटमेंट बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या विनियर्स लगवाने के बाद दांत वापस पहले जैसे हो सकते हैं?
ज्यादातर मामलों में नहीं। ज्यादातर विनियर्स के लिए थोड़ा इनेमल घिसना पड़ता है, और इनेमल वापस नहीं बनता। कुछ कंपोजिट विनियर्स में बहुत कम या बिल्कुल नहीं घिसना पड़ता, और इलाज से पहले डेंटिस्ट आपको बताएंगी कि आपके दांतों को कितना घिसना पड़ेगा।
विनियर्स कितने समय तक चलते हैं?
अच्छी देखभाल से विनियर्स अक्सर कई साल चलते हैं, लेकिन कोई भी विनियर हमेशा के लिए नहीं चलता। कंपोजिट विनियर्स को आम तौर पर पोर्सिलेन विनियर्स से पहले पॉलिश या मरम्मत की जरूरत पड़ती है।
क्या विनियर्स लगवाने में दर्द होता है?
अगर आपके दांतों को घिसना हो, तो लोकल एनेस्थीसिया दिया जा सकता है, इसलिए आपको दर्द के बजाय दबाव महसूस होना चाहिए। बाद में कुछ दिनों तक थोड़ी सेंसिटिविटी होना आम है।
क्या विनियर्स से टेढ़े दांत सीधे हो सकते हैं?
विनियर्स थोड़े ऊंचे-नीचे दांतों को छिपा सकते हैं, लेकिन उन्हें खिसकाते नहीं। टेढ़े या एक-दूसरे पर चढ़े हुए दांतों के लिए ब्रेसेस (तार) या अलाइनर्स दांत को कम नुकसान पहुंचाने वाला विकल्प हो सकते हैं।
हर किसी का मुंह अलग होता है। आपके लिए सही इलाज तभी तय होता है जब Dr. Dhara M. Sudani आपके दांतों की जांच करती हैं और ज़रूरत हो तो एक्स-रे लेती हैं। यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है, यह आपकी बीमारी की पहचान (डायग्नोसिस) नहीं है।




