पीछे के दांतों की चबाने वाली सतह सपाट नहीं होती। उसमें छोटे-छोटे गड्ढे (पिट) और गहरी लकीरें होती हैं, जिन्हें फिशर कहते हैं, और इनमें खाना और प्लाक आसानी से जमा हो जाते हैं। टूथब्रश के बाल अक्सर इन लकीरों की तली तक नहीं पहुंच पाते, इसीलिए बच्चों और टीनएजर में कई कैविटी (सड़न) पीछे के दांतों की चबाने वाली सतह से ही शुरू होती हैं।
पिट और फिशर सीलेंट एक पतली सुरक्षा परत है, जिसे डेंटिस्ट (दांतों के डॉक्टर) इन लकीरों में पेंट की तरह लगाती हैं। यह गड्ढों और लकीरों में भर जाता है और सख्त हो जाता है, जिससे सतह ज्यादा चिकनी हो जाती है – उसे साफ रखना आसान होता है और उस पर सड़न शुरू होना मुश्किल होता है। अंकलेश्वर के Divine Dental Care में डेंटिस्ट चेक-अप (जांच) के समय आपके बच्चे के पीछे के दांत देखती हैं और बताती हैं कि सीलेंट से फायदा होगा या नहीं।
इलाज में क्या होता है
सीलेंट मुख्य रूप से पीछे के पक्के दांतों पर, खासकर दाढ़ों पर, उनके निकलने के कुछ ही समय बाद लगाए जाते हैं, क्योंकि दांत निकलने के बाद के पहले कुछ साल ही वह समय होता है जब उसमें सड़न का खतरा सबसे ज्यादा होता है:
- पहली पक्की दाढ़ें आमतौर पर लगभग 6 साल की उम्र में, आखिरी दूध के दांतों के पीछे निकलती हैं, और इनके निकलने से पहले कोई दूध का दांत नहीं गिरता
- दूसरी पक्की दाढ़ें आमतौर पर लगभग 12 साल की उम्र में निकलती हैं
सीलेंट लगाने में ज्यादा समय नहीं लगता। आमतौर पर इसमें न ड्रिल चलाई जाती है, न इंजेक्शन लगाया जाता है: दांत को साफ किया जाता है, सीलेंट पेंट की तरह लगाया जाता है और फिर उसे सख्त किया जाता है, आमतौर पर क्योरिंग लाइट से।
सीलेंट की सलाह कब दी जाती है
डेंटिस्ट सीलेंट की सलाह तब दे सकती हैं, जब:
- आपके बच्चे की पहली या दूसरी पक्की दाढ़ें हाल ही में निकली हों
- पीछे के दांतों में गहरे, पतले गड्ढे और लकीरें हों, जिनमें खाना फंसता हो
- बच्चे को पहले कैविटी हो चुकी हो, या उसे सड़न का खतरा ज्यादा हो
- पीछे के दांतों को अच्छी तरह ब्रश करना मुश्किल हो, जैसे जब वे अभी निकल ही रहे हों
- किसी लकीर में सड़न के बिल्कुल शुरुआती निशान दिखें, जैसे चॉक जैसा सफेद या हल्के दाग वाला हिस्सा, लेकिन अभी छेद न बना हो
जिस दांत में पहले से कैविटी है, उसका इलाज सीलेंट नहीं है। अगर सड़न से छेद बन चुका है, तो आमतौर पर दांत में इसकी जगह फिलिंग (दांत भरवाना) की जरूरत होती है – देखें बच्चों के दांतों की फिलिंग।
पिट और फिशर सीलेंट के फायदे
- पीछे के दांतों की गहरी लकीरों में कैविटी से बचाने में मदद करता है, जहां से बच्चों की कई कैविटी शुरू होती हैं
- आमतौर पर न ड्रिल, न इंजेक्शन, और स्वस्थ दांत का कोई हिस्सा नहीं निकाला जाता
- जल्दी हो जाता है, अक्सर हर दांत के लिए बस कुछ मिनट
- नई पक्की दाढ़ों को उन सालों में बचाता है, जब उनमें सड़न का खतरा सबसे ज्यादा होता है
- लकीर में बिल्कुल शुरुआती सड़न को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है
- आगे चलकर फिलिंग की जरूरत कम हो सकती है
विजिट के लिए बच्चे को तैयार करना
सीलेंट बच्चों के सबसे आसान डेंटल इलाजों में से एक है, और डेंटिस्ट के पास जाने की आदत डालने का एक आरामदायक तरीका भी। बच्चे को बताएं कि डेंटिस्ट उसके पीछे के दांतों को मजबूत रखने के लिए उन्हें "साफ करके पेंट" करेंगी। "दर्द" या "इंजेक्शन" जैसे शब्दों से बचें – आमतौर पर ये इस विजिट का हिस्सा नहीं होते। आने से पहले बच्चे से अच्छी तरह ब्रश करने को कहें। विजिट के दौरान आप बच्चे के साथ रह सकते हैं।
Divine Dental Care में इलाज कैसे होता है
- चेक-अप। डेंटिस्ट पीछे के दांतों की जांच करती हैं, ताकि पक्का हो सके कि लकीरों में कोई कैविटी नहीं है। कम रेडिएशन वाला डिजिटल एक्स-रे सिर्फ जरूरत होने पर ही लिया जाता है।
- सफाई। चबाने वाली सतह को साफ किया जाता है, ताकि सीलेंट अच्छी तरह चिपक सके।
- सतह तैयार करना। आमतौर पर लकीरों पर थोड़ी देर के लिए एक जेल लगाया जाता है, ताकि सीलेंट अच्छी पकड़ बना सके, फिर उसे पानी से धो दिया जाता है।
- दांत को सूखा रखना। दांत को सुखाया जाता है और थूक (लार) से बचाकर रखा जाता है, क्योंकि लार लगने पर सीलेंट ठीक से नहीं चिपकता।
- सीलेंट लगाना। तरल सीलेंट को गड्ढों और लकीरों में पेंट की तरह लगाया जाता है।
- सख्त करना। सीलेंट को सख्त किया जाता है, आमतौर पर थोड़ी देर उस पर क्योरिंग लाइट डालकर।
- बाइट जांचना। डेंटिस्ट जांचती हैं कि सीलेंट सख्त हो गया है और बच्चे के दांत मिलाने पर ऊंचा नहीं लगता, और जरूरत हो तो उसे ठीक करती हैं।
इलाज के बाद देखभाल और सीलेंट का ध्यान रखना
विजिट के तुरंत बाद आपका बच्चा आमतौर पर हमेशा की तरह खा-पी सकता है, जब तक डेंटिस्ट कुछ और न कहें। सील किए गए दांत एक-दो दिन तक जीभ को थोड़े अलग लग सकते हैं; यह सामान्य है। सीलेंट ज्यादा समय तक चलें, इसके लिए:
- दिन में दो बार फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से ब्रश करना, पीछे के दांतों समेत
- बर्फ, सख्त टॉफी, पेन के ढक्कन या दूसरी सख्त चीजें चबाने से बचना
- मिठाई, बिस्किट और मीठे ड्रिंक्स सिर्फ खाने के समय ही देना
- नियमित चेक-अप के लिए आते रहना
समय के साथ सीलेंट घिस सकते हैं या उनका कोई टुकड़ा टूट (चिप हो) सकता है। डेंटिस्ट हर बच्चों के डेंटल चेक-अप में इन्हें जांचती हैं और जरूरत हो तो इनकी मरम्मत करती हैं या इन्हें दोबारा लगाती हैं। अगर बच्चा कहे कि सीलेंट खुरदरा लग रहा है या उसका कोई टुकड़ा निकल गया है, तो क्लिनिक को बताएं। सीलेंट आपके बच्चे के लिए सही रहेंगे या नहीं, यह पूछने के लिए अंकलेश्वर के क्लिनिक में अपॉइंटमेंट बुक करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
बच्चे को सीलेंट किस उम्र में लगवाने चाहिए?
आमतौर पर पक्की दाढ़ें निकलने के कुछ ही समय बाद – पहली दाढ़ें लगभग 6 साल की उम्र में और दूसरी दाढ़ें लगभग 12 साल की उम्र में। डेंटिस्ट देखती हैं कि हर दांत इतना बाहर निकल आया है या नहीं कि उस पर सीलेंट लगाया जा सके।
क्या सीलेंट लगवाने में दर्द होता है?
आमतौर पर नहीं। ज्यादातर सीलेंट में न ड्रिल चलानी पड़ती है, न इंजेक्शन लगाना पड़ता है। बच्चे को जेल का खट्टा स्वाद और दांत सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाली ठंडी हवा महसूस हो सकती है।
सीलेंट कितने समय तक चलते हैं?
सीलेंट अक्सर कई साल चलते हैं, लेकिन ये घिस सकते हैं या टूट (चिप हो) सकते हैं, खासकर अगर बच्चा सख्त चीजें चबाता हो। हर चेक-अप में इन्हें जांचा जाता है, और इनकी मरम्मत की जा सकती है या इन्हें दोबारा लगाया जा सकता है।
क्या सीलेंट लगे दांतों को भी ब्रश करना जरूरी है?
हां। सीलेंट सिर्फ चबाने वाली सतह को बचाता है, दांतों के किनारों या उनके बीच की जगह को नहीं। दिन में दो बार फ्लोराइड वाले टूथपेस्ट से ब्रश करना और मीठे स्नैक्स कम करना अब भी जरूरी है।
क्या सीलेंट सुरक्षित हैं?
सीलेंट दशकों से इस्तेमाल हो रहे हैं, और अमेरिकन डेंटल एसोसिएशन जैसी डेंटल संस्थाएं इन्हें बच्चों के लिए सुरक्षित मानती हैं। कुछ माता-पिता BPA (बिसफेनॉल A) के बारे में पूछते हैं: रिसर्च बताती है कि सीलेंट से इसका संपर्क बहुत कम और थोड़े समय के लिए होता है – खाने और पैकेजिंग जैसी रोज की चीजों से होने वाले संपर्क से भी कम। अगर मटीरियल के बारे में आपके कोई सवाल हैं, तो विजिट के समय डेंटिस्ट से पूछें।
क्या दूध के दांतों पर सीलेंट लग सकता है?
कभी-कभी। अगर दूध की दाढ़ में गहरी लकीरें हों या बच्चे को सड़न का खतरा ज्यादा हो, तो डेंटिस्ट उस पर भी सीलेंट लगाने की सलाह दे सकती हैं।
हर किसी का मुंह अलग होता है। आपके लिए सही इलाज तभी तय होता है जब Dr. Dhara M. Sudani आपके दांतों की जांच करती हैं और ज़रूरत हो तो एक्स-रे लेती हैं। यह पेज सामान्य जानकारी के लिए है, यह आपकी बीमारी की पहचान (डायग्नोसिस) नहीं है।




